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देव वार्ता समाचार

*भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी दखल कुबूल नहीं,देश का माहौल खराब करने वालों पर कार्रवाई करे सरकार:सूफी खानकाह एसोसिएशन*
अजमेर शरीफ। सूफी खानकाह एसोसिएशन की तीसरा राष्ट्रीय कार्यसमिति अधिवेशन संपन्न हुआ, जिसमें राष्ट्रीय एकीकरण, दरगाह परिषद की स्थापना, पाकिस्तानी तालिबानी पैटर्न की संभावित हिंसा रोकने के लिए शिया सूफी एकता मंच की स्थापना,सऊदी अरब के मदीना शहर में हजरत फातमा के मजार के पुनर्निमाण,तथा सूफ़ी खानकाह एसोसिएशन के संगठन विस्तार,प्रमुख राष्ट्रीय पदाधिकारियों की कट्टरपंथी शक्तियों से सुरक्षा तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष सूफी मोहम्मद कौसर हसन मजीदी के कट्टरपंथियों द्वारा स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर किए जा रहे उत्पीड़न को रोकने संबंधी विषयों पर चर्चा के साथ प्रस्ताव पारित किए गए।
इस संबंध में मीडिया से मुखातिब होते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष सूफी मोहम्मद कौसर हसन मजीदी ने कहा कि एकीकृत राष्ट्रीय एकता हिंदू मुस्लिम एकता के बिना संभव नहीं है। जो सूफी विचारधारा के प्रसार और अतिवादी विचारधारा को फैलाने वाले तत्वों को नियंत्रित करने से संभव हो सकता है। धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले बयान जो धर्मनिरपेक्षता और इस्लामी मूल्यों और हिंदू मुस्लिम एकता दोनों के लिए हानिकारक है। मौजूदा कानून को उन्नत करने और नफरत फैलाने वाले भाषणों और धार्मिक अपमान के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को कठोर सजा देने की आवश्यकता है। इस दिशा में किया गया कार्य सभी धर्मों के लोगों को एक सकारात्मक संदेश देगा।
अतिक्रमण मुक्त अभियान की आड़ में कब्रें तोड़कर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण कर राजनीतिक लाभ हेतु उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का विवादित बयान हो या फिर बजरंग दल द्वारा संविधान और कानून के खिलाफ दिए गए बयान सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ते हैं।
और भारत विरोधी ओआईसी और आईएमसी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब करने का मौका मिल जाता है।
सूफी खानकाह एसोसिएशन ऐसे किसी भी विदेशी हस्तक्षेप का विरोध करता है, और इन विदेशी ताकतों को अपनी सीमा पार न करने की सलाह देता है।
क्योंकि भारत का संविधान और भारत के लोग ऐसे असामाजिक तत्वों से निपटने में सक्षम हैं जो हिंदू मुस्लिम एकता को तोड़ते हैं।
पाकिस्तान का प्राथमिक एजेंडा भारत के बढ़ते इस्लामीकरण का प्रयास रहा है, जिसके लिए वे पिछले 75 वर्षों से भारत विरोधी गतिविधियों में सख्ती से लगे हुए हैं। पाकिस्तान संगठित सोशल मीडिया पहल और हिंसा के माध्यम से शियाओं और सूफियों को बचाने की लगातार कोशिश कर रहा है। ऐसे में शियाओं/सूफियों द्वारा संयुक्त मंच के गठन की आवश्यकता है।
क्योंकि जिस प्रकार का माहौल बनाकर पाकिस्तान में,शिया और सूफियों की हत्या की जा रही है,ठीक उसी तरह का वातावरण भारत में तैयार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए, सूफ़ी खानकाह एसोसिएशन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष पीर सूफ़ी सय्यद खालिद नकवी अल हुसैनी ने कहा कि वर्तमान में वक्फ बोर्डों के अधिकांश सदस्यों में वहाबी सलाफी और देवबंदी शामिल हैं, जो मदरसों/मस्जिदों में कट्टरपंथी विचारधारा ही नहीं फैला रहे हैं, बल्कि सूफी दरगाहों, खानकाहों और वहां की मस्जिदों पर भी नियंत्रण हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। वक्फ बोर्डों के प्रभाव को रोकने के लिए, आम जनता के हितार्थ भारत सरकार वक्फ बोर्डों को फिर से संगठित करने और उसमें सभी क्षेत्रों के साथ-साथ दरगाहों से जुड़े लोग सम्मिलित करे।साथ ही कट्टरपंथी तत्वों की बढ़ती गतिविधियों को रोकने के लिए दबाव डालने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि इसलिए आवश्यक है, कि सरकार सूफी हितों तथा उनकी वक्फ संपत्तियों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर,दरगाह परिषद की स्थापना करे
सूफ़ी खानकाह एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सूफ़ी शाह सय्यद जियारत अली हक्कानी मलंग ने बताया कि कार्यसमिति में यह चर्चा हुई कि भारत की वैश्विक स्तर पर क्या छवि है इसी तथ्य से समझा जा सकता है कि फिलिस्तीन सहित 56 इस्लामिक राज्यों के विभिन्न धर्मों के बीच सामाजिक समानता और सद्भाव के लिए हमेशा भारत पर भरोसा किया है, उनका भारत सरकार पर विश्वास है, यह तथ्य कि भारत G20 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है, यह एक स्पष्ट संकेत है। पिछले 9 वर्षों में भारत की वैश्विक छवि को मजबूती मिली है। भारत सरकार ने तीन तलाक हज और मदरसों के सुधार के संबंध में भी मुसलमानों के पक्ष में काम किया है जो प्रशंसनीय है।
मदीना के जन्नतुल बकी में पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की बेटी हजरत फातिमा की मजार के पुनर्निर्माण के लिए सूफी खानकाह एसोसिएशन भारत सरकार से सऊदी अरब की सरकार के समक्ष आवाज उठाने की उम्मीद करता है।
पत्रकार वार्ता के दौरान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सूफ़ी शाह शराफत हुसैन चिश्ती ने कहा कि,कार्यसमिति के अधिवेशन में,संगठन विस्तार के अलावा सूफ़ी खानकाह एसोसिएशन के प्रमुख राष्ट्रीय पदाधिकारियों को कट्टरपंथियों के,प्रकोप से बचाने हेतु सरकार से सुरक्षा दिए जाने की अपील की,उन्होंने बताया कि सूफी खानकाह एसोसिएशन राष्ट्रीय अध्यक्ष सूफी मोहम्मद कौसर हसन मजीदी के नेतृत्व में,लगातार हिंदू मुस्लिम एकता के लिए कार्य कर रहा है,और देश को तोड़ने वाली शक्तियों से संघर्षरत है।
किंतु आश्चर्य है कि राष्ट्रहित में संघर्षरत सूफ़ी कौसर हसन मजीदी को उनके गृह जनपद के पुलिस जनों के द्वारा कट्टरपंथी शक्तियों के इशारे पर उत्पीड़न किया जा रहा है,सार्वजनिक रूप से उनको एक सूफ़ी संत को स्थानीय पुलिस कर्मियों द्वारा अपमानित किया जाना, सूफ़ी खानकाह एसोसिएशन स्वीकार नहीं करेगा।
हम भारत सरकार से ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करते हैं।
अधिवेशन में म. प्र. महासचिव जाबिर हुसैन, सचिव जुनैद खान महाराष्ट्र से राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य हाजी मोहम्मद शफी मिट्टी शाह मलंग राजस्थान से सय्यद अब्दुल हन्नान चिश्ती सय्यद नुसैर चिश्ती यूथ महासचिव तनवीर खान प्रदेश सचिव नूर बाबा झारखंड से प्रदेश महासचिव मुमताज शराफती बिहार से राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य बाबा ज़ाकिर वारसी पश्चिम बंगाल से प्रदेश अध्यक्ष सूफी फैयाज चिश्ती सचिव सूफ़ी इमरान चिश्ती सूफ़ी आबिद चिश्ती हरियाणा से प्रदेश सचिव अफजल वारसी दिल्ली से प्रदेश सचिव जफर वारसी असम प्रदेश अध्यक्ष कुबाद अली कर्नाटक से राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य ख़्वाजा मोहम्मद सादिक सहित अन्य राज्यों से सूफ़ी खानकाह एसोसियेशन के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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