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*वक्फबोर्डअध्यक्ष-दरग़ाह प्रबन्धक जैसे पदों पर सूफी परम्परा को मानने वालो को ना बनाना ये सूफ़ियत को कमज़ोर करने की साजिश है–RSF के अध्यक्ष नौशाद अली*

आपको बता दे की राष्ट्रीय सूफीसंत फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नौशाद अली ने कहा कि सभी सरकारों ने सूफी मुसलमानों के साथ बड़ा विस्वास घात करने का ही काम किया है एक तरफ बड़े बड़े नेता सूफीयों को खुश करने और अपना नाम चमकाने के लिए दरगाह पर चादर चढ़ाने का काम लगातार करते रहते है लेकिन देश और प्रदेश में अगर सूफी मुसलमानों की हिस्सेदारी की बात को लेकर चर्चा करे तो आपको ढूंढने से भी कोई सूफी नही मिलेगा जबसे देश आजाद हुआ है तब से सूफी मुसलमानों को सरकारों द्वारा कुछ भी नही दिया गया है बल्कि सूफ़ियत के प्रचार प्रसार करने के इदारों खानकाहोंऔर सूफियों की इबादतगाहो को वक्फबोर्ड के आधीन करके सूफ़ियत को नुकसान पहुँचाने का काम ही किया गया है आप अगर उत्तराखंड की बात करे तो वर्तमान वक्फबोर्ड में कितने सूफ़ी मुसलमानो को लिया गया है मुश्किल से एक आद सूफी मुलमान नज़र आएगा लेकिन वो भी सूफी कोटे से नही होगा क्योंकि वक्फ बोर्ड में सूफी कोटा है या नही इस बात का कुछ पता नही है और अबतक वक्फबोर्ड के ज्यादातर अध्यक्ष जो सरकारों द्वारा बनाए गए है वो सूफी परम्परा को मानने वाले नही निकलेगे वो सूफ़ियत को नही बल्कि मौलवीयत को मानने वाले निकलेगे और तो और सरकार साबिर पाक की दरगाह के इंचार्ज यानी दरगाह प्रबन्धक जैसे पद पर तो कमसे कम सूफी परम्परा को मानने वाले मुसलमानों का हक बनता है लेकिन आप देख सकते हैं दरगाह प्रबन्धक भी ज्यादातर सूफी परम्परा के मानने वालो को नही बल्कि मौलवीयत को मानने वाले मुस्लिमों को ही बनाने का काम किया गया है और अभी भी किया जा रहा है और आपको बता दूं कि एक तरफ तो माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी सूफ़ियत को लेकर गम्भीर नज़र आते है आप देख सकते है कि 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वल्ड सूफ़ीकांफ्रेस कराई गई थी वही मनकी बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ये कहा गया कि सूफ़ियत ही इस्लाम की असली पहचान है और जब सूफी मुसलमानों का एक जत्था प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिला तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपना अनुभव साझा करते हुए ये कहा गया कि मने सूफी लोगों की बाते सुनी तो मुझे ऐसा अहसास हुआ जैसे संगीत बज रहा हो और अब हाल ही में भारतीय जनता पार्टी द्वारा देशभर में सूफी संवाद महाअभियान चलाया जा रहा है लेकिन इसके बावजूद भी सूफी परम्परा को मानने वाले मुसलमानों को सरकार में कोई भी हिस्सेदारी नही दी जाती है और तो ओर उनके मजहबी इदारो पर भी ऐसे लोगों को मुसल्लत कर दिया जाता है जो सूफ़ियत नही बल्कि मौलवीयत में विस्वास रखते हैं यानी वो खनकाही मुसलमान नही बल्कि मदरसाई मुसलमान है जिनको सरकार द्वारा बनाने का काम किया जा रहा है आपको बता दें कि अब सूफी मुसलमानों का हक़ सरकारों को देना पड़ेगा हमारा संगठन सूफियों की हकतल्फ़ी और किसी के भी द्वारा अगर सूफियों का शोषण करने की बात सामने आई तो हमारा संगठन RSF उसके खिलाफ मोर्चा खोलने का काम करेगा हमारा संगठन राष्ट्रीय सूफीसंत फाउंडेशन जल्द ही सूफी मुसलमानों में एक जनजागरूकता अभियान चलाकर उनको उनका हक दिलवाने की ओर कदम बढ़ाने जा रहा है वही जन तक सूफी मुसलमानों को उनका हक नही मिल जाता तब तक उनके हक के लिए आवाज को उठाने का काम करता रहेगा।

राष्ट्रीय सूफीसंत फाउंडेशन RSF
नौशाद अली राष्ट्रीय अध्यक्ष
सम्पर्कसूत्र 9917234632

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