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हम भारतीय हैं भारत है देश हमारा नौशाद अली राष्ट्रीय अध्यक्ष RSF

आज राष्ट्रीय सूफीसंत फाउंडेशन की एक बैठक को सम्बोधित करते हुए RSF के राष्ट्रीय अध्यक्ष नौशाद अली ने कहा है कि आज हिंदुस्तान में आवामी जम्हूरि हुकूमत है और हम वफादार शहरी की हैसियत से हिंदुस्तान में रहकर सूफी इज़्म की तहरीक पूरे भारत मे पेश कर रहे हैं हाला के दुनिया के किसी भी मुस्लिम मुमालिक में सूफीयों को यह हक हासिल नहीं है और मजहबी हकीकतों पर कोई रोशनी डाली जा सके या अपनी जबान खोली जा सके क्योंकि मुस्लिम हुकूमत में शाही सरियत चलाई जाती है की जो बात भी बादशाह वक़्त हुक्मरान कह दे वही बात खुदा और रसूल का मजहब मनवाया जाता है और इस हुकमुरा के खिलाफ अकीदा मजहब को शिर्क व बिदआत कहकर रोका जाता है और सजाए दी जाती है जैसे सऊदी हुकूमत गुंबाद खिजरा हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की समाधि और मिलाद शरीफ हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्मदिन मनाने को शिर्क व बिदअत कहती है गोया सऊदी हुकूमत सूफियों की इबादतों को रोकती है और सजाए देती है मगर हिंदुस्तान का यह शुक्र वह एहसान है कि भारत में जमुरी कानून बनाकर के हर शख्स को मजहबी आजादी हासिल है और हर शख्स को अपना मजहब पेश करने का पूरा-पूरा हक हासिल है जिसके लिए हर राज्य में हाई कोर्ट खुले हैं और भारतीय जमुरी कानून की हिफाजत के लिए एक सुप्रीम कोर्ट कायम कर दिया गया है बस हम सूफी लोग अपने सूफी उसूल से आगाह कर कर रहे हैं

1–सबसे पहले हम सबसे पहले अपने को हिंदुस्तानी होने पर यकीन रखते हैं और उसके बाद कौम कबीला मजहब जो कुछ मानते हैं
2– भारत के दस्तूर संविधान और हर कानून पर विश्वास रखते हैं
3– हम भारत के दोस्त को अपना दोस्त और भारत के किसी भी मुखालिफ को अपना और देश और वतन का दुश्मन समझते हैं

4–हम भारत के गैर मुस्लिम फिरको की इबादतों को ना बुरा कहते हैं और ना उन की इबादतों को नफरत से देखते हैं
5– हम गैर मुस्लिम के त्योहारों में भी शरीफ होते हैं और अपने त्योहारों में गैर मुसलमानों को भी मधु करते हैं क्योंकि हिंदुस्तान हिंदू बिरादरी के लोग भी सुफिया इकराम से अकीदतमंद है और हमारे साथ क़दम से कदम मिलाकर चल रहे हैं
6– हम गैर मुसलमानों के मय्यत वह जनाजा का भी अदब वह एतराम करते हैं और हमारे मैयत वह जनाजो में गैर मुस्लिम भी शामिल होते हैं

7– हम अपनी शरीक हयात के लिए एक वक्त में सिर्फ एक बीवी रखने पर यकीन रखते हैं

8–एक वक्त एक से ज्यादा चार बीवियां या उससे भी ज्यादा बीवियां रखना सोफिया के खिलाफ शान और खिलाफ कानून समझते हैं

9– भारत के हर कानून को एन मुताबिक इस्लाम कानून समझते हैं क्योंकि भारत के हर कानून में इंसानियत के लिए अमन व सलामती है

10– भारत के अदल वह इंसाफ पर अपनी जिंदगी का दरमदार समझते हैं जिसकी हिफाजत के लिए हर कुर्बानी के लिए तैयार है

11– हिंदू आकसरियत के एतराम और मुस्लिम अकलियत के सेहत व अमन को मदय नजर रखते हुए भारत में गौ हत्या को नाजायज व ख़तरा सेहत और नक्स अमन समझते हैं ताकि सेहत व अमन सलामती महफूज रहे

12– मक्का मदीना करबला मोल्ला की जियारत करना या दुनिया के किसी मशहूर मुकद्दस मकमात की जियारत अपनी हैसियत के मुताबिक जरूरी समझते हैं
13– हम भारत के बहादुरों और अमर शहीदों का अदब वह एतराम करते हैं क्योंकि भारत की बहादुरी से हमारी सरफराजी है 14– अरब मुमालिक या किसी मुमालिक के बने हुए मजहबी कानून को भारत में जरूरी नहीं समझते क्योंकि अरब का बनाया हुआ मजहबी कानून है के शिवाला मंदिर ताजिया मजार शिर्क व बिदअत और बुतपरस्ती है इसको देखते ही फौरन मिटा देना चाहिए यह ईमान का अव्वल दर्जा है अगर इतनी ताकत नहीं है तो जबान से बुरा भला कहना चाहिए अगर इतना भी नहीं करने का मौका है तो इसको दिल से बुरा समझना चाहिए मगर यह इमान का तीसरा और कमजोरी दर्जा है और काफिरों से दोस्ती ना करना चाहिए इनको मार कर खत्म कर देना चाहिए बस ऐसा बना हुआ अरब का कानून भारत जम्हूरियत में नहीं चल सकता है यह अरब का बनाया हुआ शाही कानून है इस्लाम का कानून नहीं है इस्लाम रहमत है और पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमेशा रहमत का नमूना पेश किया है जबरदस्ती नहीं की है यानी ला इकराफिद्दीन (दीन में जबरदस्ती नहीं है)को ध्यान में रखकर ही सूफ़ी सूफ़ियत का प्रचार प्रसार करते है

राष्ट्रीय सूफीसंत फाउंडेशन रजि0 अध्यक्ष पत्रकार नौशाद अली
सम्पर्क सूत्र 9917234632

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